हाईकोर्ट ने 14 जनवरी को गाइड लाइन जारी की। (फाइल)

  • उच्च न्यायालय द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार सुनवाई की जाएगी

मुकदमे की सुनवाई 2 फरवरी से राज्य की निचली अदालतों में शुरू होगी। यह आदेश झारखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार ने जारी किया है। सुनवाई हाईकोर्ट द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार की जाएगी। हाईकोर्ट ने 14 जनवरी को गाइड लाइन जारी की।

इसके बाद सभी जिलों की अदालतों को इसे तैयार करने को कहा गया। उच्च न्यायालय सभी तैयारियों की निगरानी कर रहा था। अब दो फरवरी से रजिस्ट्रार जनरल द्वारा भौतिक सुनवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। लगभग 10 महीने बाद शारीरिक सुनवाई हो रही है।

50% से कम मामलों वाले जिले में 50% शारीरिक न्यायालय
उच्च न्यायालय ने राज्य की अदालतों को शारीरिक सुनवाई के लिए तीन श्रेणियों में विभाजित किया है और तदनुसार दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिन जिलों में कोरोना में 50 से कम सक्रिय मामले हैं, 50 प्रतिशत भौतिक और 50 प्रतिशत आभासी अदालतें बैठेंगी। जिला जज रोटेशन के आधार पर फिजिकल और वर्चुअल कोर्ट तय करेंगे। साथ ही, विषय और कैडर के अनुसार, एक अदालत की व्यवस्था होगी।

50-100 सक्रिय मामलों वाले जिलों में भौतिक अदालतें बैठेंगी
जिन जिलों में 50 से 100 सक्रिय मामले हैं, उनमें एक तिहाई भौतिक और दो तीसरे वर्चुअल कोर्ट बैठेंगे। यहां याचिकाएं मौजूदा व्यवस्था के साथ-साथ ई सेवा केंद्र से भी दायर की जा सकती हैं। इन जिलों में एक फैमिली कोर्ट, डिस्ट्रिक्ट जज, एडीजे, सीजेएम, एसीजेएम कोर्ट बैठेंगे। दो सिविल जज, एक एसडीजेएम और एक न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) अदालत में बैठेंगे।

150 से अधिक मामलों वाले जिलों में एक-चौथाई भौतिक न्यायालय
150 से अधिक सक्रिय मामलों वाले जिलों में एक-चौथाई भौतिक और तीन-चौथाई आभासी अदालत की सुनवाई होगी। इन जिलों में याचिकाएं ड्रॉप बॉक्स में डाली जाएंगी। इन जिलों के जिला न्यायाधीशों को एक रोस्टर विषयवार तैयार करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही, कॉज फॉर सदाचार और फिजिकल कोर्ट की एक सूची जारी करनी होगी।

बिना नकाब के किसी को भी अदालत में प्रवेश नहीं मिलेगा
गाइड लाइन में कहा गया है कि अदालत परिसर के अंदर सभी कार्यालयों में सामाजिक गड़बड़ी का पालन किया जाना चाहिए। बिना मास्क के किसा को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही सैनिटाइजेशन की व्यवस्था करनी होगी। सभी को आवश्यक निर्धारित दूरी का पालन करना होगा।

चैंबर ऑफ वकीलों के लिए भी निर्देश
कोर्ट परिसर के अंदर स्थित चैंबर ऑफ वकीलों के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। यहाँ भी सभी को सामाजिक भेद का पालन करना पड़ता है। सैनिटाइजेशन की व्यवस्था करनी होगी। चेंबर को सुबह 10 से शाम 5 बजे तक खोलने की अनुमति होगी। रविवार और अन्य छुट्टियों के दिन चैंबर को पवित्र करना अनिवार्य होगा। ऑड ईवन डे पर भी चेंबर खोलने का विकल्प है।

बार काउंसिल ने स्वागत किया

झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण ने कहा है कि शारीरिक अदालत शुरू करने का फैसला स्वागत योग्य है। उन्होंने वकीलों से अपील की है कि वे कोविद के मद्देनजर उच्च न्यायालय, राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद शारीरिक सुनवाई करें। परिषद के उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ला ने भी फिजिकल कोर्ट खोलने का स्वागत किया है।

 

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